रख देती है
चिड़ियों की तरह
एक बुद्धिमान लडकी
बार-बार
अपनी ओढ़नी
बार-बार
एक बुद्धिमान लडकी
उसकी आवाज़
दीवारों में
एक बुद्धिमान लडकी
धरेलू काम करती है
रात में सो जाती है
मेरे चेहरे का कोई शरीर नहीं है न हाथ,न पैर न ही पेट केवल चेहरा है. अन्दर से खोखला पूरी तरह संवेदनाओं से,सोच से,विचार से पूरी तरह खोखला. मगर मेरा चेहरा सजग है उन संवेदनाओं के लिए जो उससे जुडी है उन सोच व् विचारों से जिनमें उसका स्वार्थ हो उन चिंताओं के लिए जिससे उसका अपना सरोकार हो. उसे ज़रुरत नहीं पडती हाथों की,पैरों की, न ही पेट की उसे ज़रुरत है केवल चेहरे की चेहरे को चेहरा बनाये रखने के लिए इसलिए वह केवल एक चेहरा है उसका कोई शरीर नहीं. |
पूरी रात जागता रहा
सपने सजाता,
तुम आती थीं जाती थीं
फिर आती फिर जाती ,
परन्तु
यादें करवट लिए सो रही थीं
सुबह,
यादों ने ही मुझे झझकोरा
और जगाया,
जब मै जागा
यादें दूर खड़ी हो
घूर-घूर कर मुझे देखती
और मुस्कुरा रहीं थीं
मैंने कहा
चलो हटो ,
आज नई सुबह है
मै नई यादों के साथ रहूँगा
वे नजदीक आईं
और जोर-जोर से हंसने लगीं
लाख जतन किए
वे गयी नहीं
यादें जाती नहीं
पूरे घर पर
कब्जा कर बैठी हैं


एक दिन
मैनें बारिश की
गुमसुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई
कानूनी रोजनामचे में
दुसरे दिन सुबह
मेरा घर बाढ़ में बह गया
मैंने ललकारा
गाँव में फ़ैली खामोशी को
छलनी कर दिया गया मेरा पूरा जिस्म
गोलियों से
यह कानून की व्यवस्था
या व्यवस्था का कानून है
मै नहीं समझ पाया
कानून और व्यवस्था
मगर तय है
जिसकी जड़े मजबूत हैं
बाढ़ भी नहीं बहा सकती उन्हें
जो छातियाँ पहले से छलनी हों
उन्हें और छलनी नहीं किया जा सकता
और
हाँ और
खामोशियों की भी जुबान होती है
कान होते हैं ,नाक होती है
होते हैं हाथ पैर
एक दिन
हाँ, किसी एक दिन
जब खडी हो जायेंगी खामोशियाँ
चीखती हुई
उठाये हुए हाथ
तब
और तब
छलनी होगी कानून की छाती
बह जायेगी खामोशी की बाढ़ में
सारी व्यवस्था
एक दिन