रविवार, 13 नवंबर 2011

क्रांति

बीच  चौराहे  में पहुँच
उसने
अपना एक हाथ
ऊपर उठाया
फिर
पीछे मुड कर देखा
दो - चार और लोगों ने
अपने - अपने हाथ ऊपर उठा दिए
और
और क्रांति हो गयी
वह मुस्कुराया थोडा आगे बढ़ा
फिर
फिर उसने
अपने दोनों हाथ ऊपर उठाये
कुछ और लोगों ने अपने - अपने हाथ
ऊपर उठाये
कुछ ने एक कुछ ने दोनों
 क्रांति चरम पर पहुँची
वह खुशी से चीख पड़ा
उत्तेजना नस -नस में  उछाल मारने लगी 
वह दौड़ने लगा
तेज दौड़ने लगा
भीड़ उसके पीछे दौड़ने लगी
वह रुका
भीड़ भी रुक गयी
वह फिर दौड़ने लगा
चारो तरफ हाथ उठाये
भीड़ अचकचाई
भीड़ में शामिल लोगों नें एक दुसरे को देखा
 इकट्ठे हुए
उसे घेरा और मार डाला
एक और क्रांति हुई
राष्ट्र में शांती व्यवस्था कायम हो गयी
और सारी व्यवस्थाएं  पटरी पर
आम आदमी थियेटर से
बाहर निकला
रात सर्दी  जादा थी
बिस्तर में दुबक कर सो गया

2 टिप्‍पणियां:

  1. भीड़ में शामिल लोगों नें एक दुसरे को देखा
    इकट्ठे हुए
    उसे घेरा और मार डाला
    एक और क्रांति हुई
    राष्ट्र में शांती व्यवस्था कायम हो गयी

    lajabab prastuti ke liye abhar.

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